• Silhouette of a father and daughter holding hands while walking on a path with a pink and orange abstract background.

    Papa ki Poetry

सँवर के चली गोरी
Manisha Bhati Manisha Bhati

सँवर के चली गोरी

साज-सज्जा, चंचल मन और मिलन की ओर बढ़ते कदम - यह कविता प्रेम के उस कोमल क्षण को चित्रित करती है जहाँ गोरी चंदा को छूने चले चकोर जैसी आकांक्षा लेकर साजन की ओर बढ़ती है।

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इधर जाऊँ या उधर जाऊँ
Manisha Bhati Manisha Bhati

इधर जाऊँ या उधर जाऊँ

चाहत की दो राहों के बीच खड़ा मन, जो अंततः चयन से आगे बढ़कर मुक्ति की राह खोजता है।

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