अपने हिस्से का जीवन
कुछ जीवन हमें मिलता है, कुछ हमें स्वयं गढ़ना पड़ता है। यह कविता अपने हिस्से के सपनों, प्रेम, बिछड़नों, आत्मसम्मान और जीने की जिद की कहानी है।
कुछ जीवन हमें मिलता है, कुछ हमें स्वयं गढ़ना पड़ता है। यह कविता अपने हिस्से के सपनों, प्रेम, बिछड़नों, आत्मसम्मान और जीने की जिद की कहानी है।