तेरी याद

दिल का दर्द गहराता रहा,
हर साँस के साथ तेरी याद सताए,
खिड़की पर ठहरी शाम की रोशनी में
तेरा चेहरा चुपके से उभर आए।
मेरी हर आह से निकले दुआ,
ज़िंदगी तेरा भी दिल तोड़ जाए,
इश्क़ किसी और से तुझे रास न आए।

प्यार में मैंने सब किया निछावर,
फिर भी तुम समझ न पाए।
जिसे कहते हो तुम क्षणिक प्रेम,
वो मोहब्बत मेरे रोम-रोम में समाए।
लाख जतन के बाद भी तुम्हें न भुलाए,
न जाने कैसी ज़िद है दिल की,
हर बार तुझसे ही मिलने को जाए।

एक बार मेरे दिल में देखो ज़रा,
हर अंश में पाओगे तुम ख़ुद को।
इश्क़ मेरा चाहे रहे अधूरा,
मेरी रूह को कोई न भाए तेरे सिवा।
कुछ और न चाहूँ, गर तू हो जाए मेरा,
जब तक समझो कि तुम्हारा दिल भी चाहे साथ मेरा,
कहीं ज़िंदगी का सूरज कह न दे अलविदा।

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The Stories We Tell Ourselves, and the Stories We Are Asked to Believe